यश हरिद्वार न्यूज✍️

देवेश वर्मा रिपोर्ट ✍️
26-09-2025—“मौन, नारी शक्ति और युवाओं की प्रेरणा पर आधारित अद्भुत प्रस्तुतहिंदी कविता केवल शब्दों का खेल नहीं अपितु यह संवेदनाओं, विचारों और समाज के मूल्यों का जीवंत प्रतिबिंब है। जब कविता सही मंच और सही आवाज़ पाती है, तो उसका प्रभाव श्रोताओं के दिलों और दिमाग़ पर स्थायी छाप छोड़ता है। हाल ही में आकाशवाणी दिल्ली के भारत रत्न पंडित रविशंकर स्टूडियो में आयोजित काव्यगोष्ठी “कुछ कहता है दिल” ने इसी बात को प्रमाणित किया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध था, बल्कि भावनाओं और प्रेरणा का अद्वितीय संगम भी था। सभागार में साहित्यप्रेमियों, युवा विद्यार्थियों और वरिष्ठ रचनाकारों की उपस्थिति ने इसे विशेष बना दिया।
काव्यगोष्ठी की सबसे रोचक और सम्मोहक प्रस्तुति रही उत्तराखंड के हरिद्वार से आईं युवा कवयित्री अपराजिता ‘उन्मुक्त’ की। उनका मंच पर आना ही श्रोताओं में उत्साह की लहर दौड़ा गया। उनके आत्मविश्वास और सहजता भरे व्यक्तित्व ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञान व्रत जी और सुनील शास्त्री जी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अनुभवी मंच-संचालिका नीलम कानिया जी ने किया।

अपराजिता ‘उन्मुक्त’ की कविताएँ समकालीन चेतना और पारंपरिक भावनाओं का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करती हैं। उनके शब्द जितने सरल और सहज हैं। विचार उतने ही उत्कृष्ट और प्रखर हैं । जो उनके काव्य को विशेष बनाती है। मंच पर उनका हर कदम, हर भाव और हर आवाज़ श्रोताओं के दिलों को छूने वाला था।
काव्यपाठ की शुरुआत अपराजिता ‘उन्मुक्त’ ने मौन विषय पर अपनी रचना से की। इस कविता में उन्होंने मौन को केवल चुप्पी के रूप में नहीं देखा, बल्कि आंतरिक शक्ति, आत्मचिंतन और मानसिक शांति का प्रतीक बताया। उन्होंने आकाशवाणी दिल्ली के मंच पर शब्दों को इस तरह प्रस्तुत किया कि श्रोताओं ने एक क्षण के लिए सांस रोक ली। हर पंक्ति में जीवन और अनुभूति का दाब था, जो लोगों को भीतर तक छू गया। आधुनिक जीवन की भागदौड़, सोशल मीडिया और शोर-शराबे के बीच मौन की शक्ति को उन्होंने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।
इसके बाद उन्होंने नारी सशक्तिकरण पर आधारित अपनी रचना “सृष्टि का आधार तुम्हीं हो” प्रस्तुत की। इस कविता में अपराजिता ने नारी को केवल सृजनकर्ता या सहायक शक्ति के रूप में नहीं देखा, बल्कि समाज और संस्कृति की मुख्य धुरी बताया। उन्होंने कहा कि नारी का धैर्य, करुणा और संकल्प समाज की उन्नति के लिए अनिवार्य हैं। उनका मंचीय अंदाज़, भावों की तीव्रता और शब्दों की स्पष्टता ने श्रोताओं के भीतर गर्व और ऊर्जा का संचार किया। छात्राओं और शिक्षिकाओं ने इस कविता की खूब प्रशंसा की। यह दर्शाता है कि कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और प्रेरित करने का सशक्त माध्यम भी है।
तीसरे चरण में उन्होंने अपनी सुप्रसिद्ध प्रेरक कविता “ईश्वर तुझ पर नाज़ करेगा” प्रस्तुत की। यह कविता युवाओं के हौसले और आत्मविश्वास पर केन्द्रित थी। अपराजिता ने मंच पर अपने शब्दों को ऐसे बुना कि हर पंक्ति श्रोताओं के भीतर उत्साह और प्रेरणा का संचार करती रही। कविता ने संदेश दिया कि संघर्ष और अनुशासन से ही वास्तविक सफलता और सम्मान प्राप्त होता है। श्रोताओं के चेहरे पर चमक और तालियों की गूँज इस कविता की प्रभावशाली प्रस्तुति का प्रमाण बन गई।
काव्यगोष्ठी का अंतिम और सबसे ऊर्जावान क्षण था जब अपराजिता ने अपनी युवा-केंद्रित रचना “युवा विवेकानंद हो” प्रस्तुत की। इसमें उन्होंने युवाओं को उनके अंदर छिपी ऊर्जा, विवेक और देशप्रेम को जागृत करने के लिए प्रेरित किया। स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आज के संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि केवल भौतिक सफलता के पीछे न भागें, बल्कि आत्मनिर्माण और राष्ट्रनिर्माण में भी योगदान दें। इस कविता ने श्रोताओं के मन में नई दिशा और साहस का संचार किया।
कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं की प्रतिक्रियाएँ भी अत्यंत उत्साहजनक थीं। कई लोग भावुक होकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, तो कुछ श्रोताओं ने कवयित्री से सीधे संवाद किया। युवा विद्यार्थियों ने बताया कि उनके शब्दों ने उन्हें अपने सपनों और जिम्मेदारियों की ओर नए दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा दी। वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपराजिता की शैली, भावनात्मक गहराई और समकालीनता की प्रशंसा की।
वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञान व्रत जी ने कहा कि अपराजिता ‘उन्मुक्त’ जैसी युवा रचनाकार नई पीढ़ी के लिए उम्मीद की किरण हैं। सुनील शास्त्री जी ने उनकी कविताओं की मौलिकता, भावपूर्ण प्रस्तुति और समसामयिकता की सराहना की।
आकाशवाणी दिल्ली के भारत रत्न पंडित रविशंकर स्टूडियो का यह मंच अपराजिता के लिए न केवल काव्य प्रस्तुत करने का अवसर था, बल्कि उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को व्यापक रूप से प्रदर्शित करने का भी माध्यम बन गया। मंच का माहौल गरिमामय, सुसज्जित और अनुशासित था। श्रोताओं की बैठने की व्यवस्था, मंच की सजावट, प्रकाश और ध्वनि का संयोजन — सब कुछ एक आदर्श काव्यगोष्ठी का अनुभव प्रदान कर रहा था।
“कुछ कहता है दिल” शीर्षक इस काव्यगोष्ठी के वातावरण के बिल्कुल अनुरूप था। हर कविता, हर भाव और हर शब्द श्रोताओं तक गहराई से पहुँचा। युवा कवयित्री अपराजिता ‘उन्मुक्त’ के काव्यपाठ ने स्पष्ट कर दिया कि कविता केवल शब्द नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की उड़ान है, जो समाज और संस्कृति को संजीवनी देती है।
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