💥स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और श्री चम्पतराय जी की हुई दिव्य भेंटवार्ता

ऋषिकेश , 17 दिसम्बर। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव श्री चम्पतराय जी की भेंटवार्ता हुई। दोनों दिव्य विभूतियों ने श्री राम मन्दिर निर्माण के विषय में चर्चा की। स्वामी जी हिमालय की हरित भेंट शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आगामी वर्ष 2024, विगत पांच सौ वर्षों के महापुरूश्चरण के सुखद परिणाम को लेकर आ रहा हैं, जिसके माध्यम से हम सभी भारत की आस्था, व्यवस्था, दिव्यता और भव्यता के दर्शन करेंगे। 500 वर्षों की तप, साधना व बलिदान के बाद का यह समय श्री राम मन्दिर से राष्ट्र मन्दिर के नवनिर्माण का समय है।

स्वामी जी ने कहा कि श्रीराम मन्दिर निर्माण व प्रभु श्री रामलला की स्थापना उन 500 वर्षों से अनेक पीढ़ियों द्वारा किये गये महायज्ञ की पूर्णाहुति का दिव्य परिणाम है। जो जहां पर हैं, चाहे भारत में हो या भारत के बाहर हो अपने समर्पण, श्रद्धा, विश्वास और आस्था की आहुतियाँ श्रद्धापूर्वक समर्पित करें और राष्ट्र के नवनिर्माण की यात्रा में अपना उत्कृष्ट योगदान प्रदान करें।

इस अवसर पर श्री चम्पत राय जी ने श्रीराम मन्दिर के लिये विगत 500 वर्षों से किसी न किसी रूप से श्री राम भक्तों द्वारा दिये बलिदान को याद करते हुये कहा कि भारत बलिदानियों का देश हैं। चाहे हम वीर योद्धा महाराणा प्रताप, गुरूगोविंद सिंह जी या फिर स्वतंत्रता संग्राम सैनानी के बलिदान को याद करें सभी ने किसी न किसी उद्देश्य से अपनी मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुतियाँ समर्पित की हैं। आज हम जो भव्य व दिव्य श्रीराम मन्दिर के निर्माण को देख रहे हैं वह 500 वर्षों के तप व सत्य की विजय का द्योतक है।

उन्होंने बताया कि श्रीराम मन्दिर का गर्भ गृह तैयार है और प्रभु श्रीराम जी के बाल स्वरूप, पांच वर्ष के बालक के स्वरूप की मनमोहक प्रतिमा भी तैयार हैं। श्री राममन्दिर सम्पूर्ण राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है। श्री रामजन्म भूमि को वापस प्राप्त करने के लिये अनेकों ने अपने जीवन का उत्सर्ग किया और करोडों श्रद्धालुओं ने किसी न किसी रूप में मन्दिर निर्माण हेतु अपना परिश्रम दिया; समर्पण भाव दिया इसलिये श्री राम मन्दिर सम्पूर्ण राष्ट्र का है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्री चम्पतराय जी को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट करते हुये कहा कि उनकी सेवा, समर्पण अद्भुत है। श्रीराम मन्दिर और सनातन ही उनकी साधना है इस साधना को नमन करते हुये उन्हें शाल पहनाकर उनका अभिनन्दन किया

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