यश हरिद्वार न्यूज                         

अरुण कुमार पाठक   ÷ रिपोर्ट 🏒

23 दिसम्बर, 2024 हरिद्वार  अध्यात्म चेतना संघ द्वारा आयोजित किये जा रहे विराट श्रीमद्भगवद्गीता जयन्ती महोत्सव-2024 के अन्तर्गत आज श्रीमद्भागवत सप्ताह के पहले दिन कथा व्यास तथा संस्था के संस्थापक आचार्य करुणेश मिश्र ने श्रीमद्भागवत पुराण के महत्म्य का श्रवण कराया।
पहले दिन की कथा का श्रवण कराते हुए आचार्य करुणेश मिश्र ने कहा कि, ‘मोह ही शोक का कारण होता है। ईश्वर इस संसार को बनाने में कोई मोह नहीं, पालन करने में अहंकार नहीं और‌संहार करने में कोई शोक भी नहीं होता, क्योंकि वह पूर्णतः निर्लेप हैं। तीनों अवस्थाओं में वह सम रहते हैं।’
आचार्य ने कहा कि, ‘व्यक्ति यदि भगवान से प्रेम करे, तो उसे भगवान की कथा से भी प्रेम हो जायेगा, और कथा से प्रेम हुआ, तो सम्पूर्ण मनुष्य जीवन ही धन्य हो जायेगा। मनुष्य बनना, भक्ति की प्यास जागना ईश्वरीय कृपा है, लेकिन, किसी संत का मिलना अत्यन्त दुर्लभ है। यह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है‌। ज्ञान-वैराग्य की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि, मनुष्य में यदि भक्ति जाग्रत न हो, तो ज्ञान और वैराग्य दोनों‌ ही शिथिल हो जाते हैं।‌ भक्ति को जाग्रत करने का सबसे बड़ा उपाय श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना है।
कथा का शुभारम्भ पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण जी ने किया। मुख्य अतिथि कोर विश्वविद्यालय के कुलपति जे.सी. जैन ने किया। कथा कर मुख्य यजमान श्री गणेश शर्मा ‘बिट्टू’ तथा श्रीमती निकिता शर्मा हैं।
– अरुण कुमार पाठक
मीडिया प्रभारी एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष
अध्यात्म चेतना संघ, हरिद्वार

 

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