न्यूज टेबलेट यश हरिद्वार

*✨परमार्थ निकेतन में श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य व भव्य आयोजन*

*💥स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य और आशीर्वाद*

*🌸हरि कथा हरित कथा हेतु किया प्रेरित*

*🌺भागवत भास्कर, गोपालक संत श्री सदानन्द जी के श्रीमुख से गंगा तट पर श्रीमद् भागवत कथा रूपी ज्ञान गंगा हो रही प्रवाहित*

*✨श्रीमद् भागवत कथा में है जीवन के उत्थान का संदेश*

*🙏🏻स्वामी चिदानन्द सरस्वती*

 

ऋषिकेश, 8 फरवरी। परमार्थ निकेतन गंगा तट पर श्रीमद् भागवत कथा रूपी ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही है। दिव्य व भव्य श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने हरि कथा हरित कथा का संदेश दिया।

भागवत भास्कर, गोपालक संत श्री सदानन्द जी के श्री मुख से श्रीमद् भागवत कथा की ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि श्रीमद् भावगत कथा में प्रभु की लीलाओं का अद्भुत आनन्ददायक वर्णन किया गया है जिसे श्रवण कर चित्त उन दिव्य लीलाओं में मग्न होकर शांत हो जाता है।

श्रीमद् भागवत कथा में सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक मूल्यों के साथ प्राकृतिक वातावरण का अद्भुत समन्वय किया गया है। यह कथा जीवन के उत्थान का संदेश देती है।

भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में प्रकृति के मनोरम दृश्यों और प्रसंगों का वर्णन प्रकृति के प्रति हमारी चेतना जागृत करने के लिये किया है और बताया है कि पृथ्वी की परिपूर्णता प्रकृति से है और इसी परिपूर्णता का अद्भुत वर्णन श्रीमद् भागवत कथा में किया गया है।

हम कहते हैं जल ही जीवन है इसकी यथार्थता का प्रसंग श्रीमद्भागवत पुराण में मिलता है जिसमें हमारी नदियों को उस विराट ब्रह्म की नाड़ियाँ कहा गया है। नदियां स्वच्छता व पवित्रता का सर्वोत्तम साधन है जो शरीर व अतंकरण दोनों को निर्मल करती है तथा प्रकृति से हमें सभी अभीष्ट वस्तुओं की प्राप्ति होती है जिसके बिना हमारे जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती अर्थात् प्रकृति की अनुकूलता ही हमारी उन्नति का आधार है और प्रकृति की प्रतिकूलता हमारे विनाश का कारण भी हो सकती है जिसे हम सभी देख रहे हैं इसलिये जरूरी है हमारी कथायें, हमारे आयोजन, पर्व और त्यौहार हरित हो और पर्यावरण संरक्षण के लिये समर्पित हो।

कथा व्यास श्री सदानन्द जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन को आनन्दित कर देती है। जीवन के वियोग व विषाद को आनन्द में बदल देती है परन्तु कथा अगर परमार्थ निकेतन के दिव्य, सात्विक, सौम्य, शान्त गंगा के तट पर हो तो वह अपने आराध्य शरणागत वत्सल की शरण में स्थान प्रदान कराती है। जीवन की अशान्ति, कोलाहल, शोर और प्रदूषण से दूर परम आनन्द की प्राप्ति कराती है।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनेक प्रसंगों में प्रकृति की महिमा का अद्भुत वर्णन किया गया है और बताया गया है कि प्रकृति का संतुलन मानव समाज के लिये हितकर है और असंतुलन समाज के लिये घातक है। श्रीमद् भागवत पुराण हमें प्रकृति के प्रति मर्यादित जीवन जीने का संदेश देती है। आईये परमार्थ निकेतन के इस दिव्य तट से प्रकृति के सेवार्थ आचरण करने का संकल्प ले।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कथा व्यास श्री सदानन्द जी को माँ गंगा के आशीर्वाद स्वरूप रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट किया। दोनों दिव्य विभूतियों ने एक-दूसरों को अंगवस्त्र भेंट कर दिव्य संत परम्परा का अभिनन्दन किया। इन दिव्य पलों का आनन्द कथा आयोजक जैन परिवार और भारत के विभिन्न राज्यों से आये भक्तों ने लिया।

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