यश हरिद्वार न्यूज ब्यूरो

जितेंद्र शर्मा ( हरिद्वार )उत्तराखंड

जनपथ देहरादून ~ऋषिकेश ÷ परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज माँ दुर्गा का द्वितीय स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी के पावन दिवस पर प्रार्थना करते हुये कहा कि मां ब्रह्मचारिणी सभी को आन्तरिक शान्ति, सिद्धि और समृद्धि प्रदान कर तपोनिष्ठ बनायें।

 

आज के ही दिन महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने आर्य समाज की स्थापना भी की थी ताकि सभी को वेदों के अधिकार प्राप्त हो सके; सभी महान और सुसंस्कृत बनंे। साथ ही आर्य समाज का आदर्श वाक्य ‘क्रिनवंतो विश्वम आर्यम’ वेदों से लिया गया हैं, जिसका तात्पर्य है ‘‘ब्रह्मांड को महान बनाना।’’ उन्होंने आर्य समाज की स्थापना हिंदू धर्म के मूल, मूल्यों और मान्यताओं को संरक्षित करने के लिये की थी।

 

स्वामी जी ने कहा कि भारत की माटी और जल में समाहित इन दिव्य वेद मंत्रों की ध्वनि और नाद। इनके प्रभाव से ही भारत सदियों से पूरे विश्व को शान्ति का संदेश देता आ रहा है। भारत ने वेद से विमान तक प्रगति की और वह प्रगति शान्ति पर आधारित रही है अर्थात हमारे मूल में शान्ति और हमारी प्रगति का आधार भी शान्ति है।

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