यश हरिद्वार न्यूज़ ✍️

अरुण कुमार पाठक ✍️
15अगस्त 2025 हरिद्वार- ‘आजादी वरदान नहीं है, मनमर्जी करते रहने का,
अभिव्यक्ति का अर्थ नहीं है, कुछ भी कहते रहने का’ आज़ादी के नाम पर मनमाना व्यवहार, मनमर्जी बयानबाजी और तमाम प्रकार की देश और समाज विरोधी गतिविधियों में संलग्न रहने वालों को, चेतना पथ के संपादक व वरिष्ठ कवि अरुण कुमार पाठक ने भेल, सैक्टर-5बी स्थित सुपरवाइज़र एण्ड जूनियर आफीसर्स एसोसिएशन के कार्यालय में परिक्रमा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित ‘स्वतंत्रता दिवस काव्य गोष्ठी में अपनी काव्य रचना पढ़ते हुए, उक्त सीख दी।
माँ सरस्वती के विग्रह के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्पण तथा राजकुमारी ‘राजेश्वरी’ की वाणी वंदना से आरम्भ होकर देर शाम तक चली गोष्ठी में अनेक वरिष्ठ और युवा जोश के कवि-कवियित्रियों ने मुख्यतः देशप्रेम तथा राष्ट्र के शहीदों के सम्मान में ही काव्य पाठ कर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। काव्य पाठ से पूर्व वरिष्ठ कवि श्री बृजेंद्र हर्ष को ‘काव्य रत्न सम्मान’, बिजनौर से पधारे श्री कर्मवीर को ‘काव्य भूषण सम्मान’ तथा श्री देवेंद्र कुमार मिश्रा को ‘परिक्रमा गौरव’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इन सभी का सम्मान पुष्पमाला, शाल तथा सम्मान पत्र भेंट कर किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता मूर्धन्य कवि एवं छंद विशेषज्ञ पं. ज्वाला प्रसाद शांडिल्य ‘दिव्य’ ने की, जबकि, काव्यगत संचालन परिक्रमा सचिव शशिरंजन ‘समदर्शी’ ने किया।
काव्य धारा में प्रवेश करते हुए पारिजात अध्यक्ष सुभाष मलिक ने ‘आओ उन्हें याद करें मौत से जो नहीं डरे, ऐसे अनमोल थे रतन मेरे दोस्तों’, युवा कवि अरविन्द दुबे ने ‘आज़ादी ख़ैरात नहीं निजरक्त बहाया जाता है, ज्यादा सहनशील होना भी कायरता कहलाता है’, डा. सुशील त्यागी ‘अमित’ ने ‘भारत की गरिमा को कोई आँच नहीं आने देंगे, प्राण बलिदान कर लाज को बचाएँगे’, राजकुमारी ‘राजेश्वरी’ ने ‘ना भारत भूमि हो खाली कभी वीरों लड़ाकू से, यही सब सोच कर सैनिक स्वयं का रक्त बोता है’, प्रभात रंजन ने ‘जान की बड़ी दे दे कर हमने वतन सजाया है’, दिव्यांश ‘दुष्यन्त’ ने ‘गुलामी के काले बादल थे, वो उसमें एक उजाला था, माँ पन्ना के प्यार और स्वराज ने जिसको पाला था’ कह कर राष्ट्र निर्माताओं व शहीदों के प्रति अपनी-अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। मदन सिंह यादव ने कहा-‘ भारत माता का हम सब पर, कोटि-कोटि उपकार है।’ ‘स्वधर्म की संकल्पना हिंदुत्व की परिकल्पना शीर्ष कट जाए मगर स्वराज की हो वंदना’ के साथ युवा जोश की कवियित्री अपराजिता ‘उन्मुक्त’ आज़ादी की अक्षुण्यता का जयघोष किया।
देवेन्द्र मिश्र ने गाया-‘ अमर तिरंगा अमर रहे यह विजयी हिंदुस्तान का’, अमन शुक्ला ‘शशांक’ ने कहा-‘ कूट-कूट देश भक्ति भारती से प्यार हो हर एक व्यक्ति में रवानी होनी चाहिए’, प्रेम शंकर शर्मा ‘प्रेमी’ ने कहा- ‘माँ भारती की महिमा गाता सारा देश है’, वरिष्ठ कवि पुष्पराज धीमान ‘भुलक्कड़’ ने अंधविश्वास पर चोट करते हुए कहा- ‘लगे हुए हम लोग भगवान तेरी तलाश में, कोई ढूंढ रहा मथुरा काशी कोई ढूंढ रहा कैलाश में’ तो वरिष्ठ कवि साधुराम ‘पल्लव’ ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर ‘देवकी के पुत्र हैं यशोदा के दुलारे कृष्ण, दीप वसुदेव के तो नन्द के उजारे कृष्ण’ तथा बंदना झा ने ‘श्याम को दिल दिया उनके मांगे बिना, सबसे होकर ज़ुदा उनकी होने लगी’ के साथ कृणा आराधन किया। गोष्ठी अध्यक्ष पं. ज्वाला प्रसाद शांडिल्य ‘दिव्य’ ने अंत में गोष्ठी की रचनाओं की सार्थक समीक्षा की।
गोष्ठी में मीनाक्षी चावला, संजीव कुमार शर्मा ‘अंश’, कंचन प्रभा गौतम, कविता जैन, कल्पना कुशवाहा, सौरभ कौशिक, आशा साहनी, बंदना झा, चित्रा शर्मा तथा मदन सिंह यादव ने भी कविता पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज की।
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