यश हरिद्वार न्यूज ब्यूरो

देवेश वर्मा (हरिद्वार) उत्तराखंड

अंगदान सबसे बड़ा परोपकार व महादान : आचार्य बालकृष्ण

अंगदान का संकल्प लें, एक दाता बचा सकता है 8 लोगों की जान : आचार्य बालकृष्ण

पहले दिन शिविर में लगभग 65 व्यक्तियों ने कराया अंगदान हेतु पंजीकरण

जनपथ हरिद्वार # 25 जुलाई। पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के अंतर्गत रचना शारीर विभाग के तत्वाधान में आयोजित अंगदान पंजीकरण शिविर का शुभारंभ पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण जी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर अंगदान की शपथ लेते हुए उन्होंने अंगदान को महादान बताया तथा सभी देशवासियों से अंगदान का आह्वान किया।
आचार्य जी ने कहा कि अंगदान से बड़ा कोई परोपकार नहीं है। मरणोपरांत यह शरीर हमारे लिए मिट्टी के समान है किंतु हमारे द्वारा दान किए गए अंग किसी जरूरतमंद को दूसरा जीवन अवश्य प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक दाता 8 लोगों की जान बचा सकता है। हमारे गुर्दे, यकृत, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जीवन बचाने में सहायक हैं तो वहीं नेत्रदान दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन को बेहतर बना सकता है।
आचार्य जी से प्रेरणा लेकर संस्थान के विभिन्न इकाईयों के शिक्षकों, चिकित्सकों सहित लगभग 65 कर्मयोगियों ने अंगदान हेतु पंजीकरण कराया।
ज्ञात हो कि प्रत्येक वर्ष 3 अगस्त को सम्पूर्ण भारत में ‘भारतीय अंगदान दिवस’ मनाया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रलय, भारत सरकार की संस्था NOTTO (नेशनल ऑर्गन एण्ड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) द्वारा जुलाई माह को ‘अंगदान जनजागरूकता अभियान’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस उद्देश्य से पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के तत्वाधान तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार के दिशानिर्देशन में पांच दिवसीय अभियान विगत 23 जुलाई से संचालित है जिसका समापन 27 जुलाई को किया जाएगा। इस आयोजन में 23 जुलाई को अंगदान जनजागरूकता शपथ का आयोजन, 24 जुलाई को जनजागरूकता दौड़ का आयोजन तथा 25 जुलाई को अंगदान पंजीकरण शिविर का प्रारंभ किया गया।
कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य वैद्य गौरव शर्मा ने किया। प्राचार्य प्रो. अनिल यादव ने कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक ‘अंगदान महादान’ प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक बिग्रेडियर टी.सी. मल्होत्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरूण पाण्डेय सहित सभी विभागाध्यक्ष, आचार्य, सह-आचार्य, सहायक आचार्य, सभी चिकित्सक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन रचना एवं शारीर विज्ञान के विभगाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सचिन रावन ने किया।

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