यश हरिद्वार न्यूज़ ✍️

अरुन कुमार पाठक ✍️
14 सितम्बर 2025 हरिद्वार- “भारतवर्ष के अनेक प्रान्तों की भाषाएँ उनकी अपनी मातृ भाषाएँ हैं तथा ये सभी संस्कृत भाषा के अपभ्रंष के रूप में हैं, जबकि हिन्दी भारत की मातृभूमि की संस्कृति है। हिन्दी वह सूत्र है, जो इन सब भाषाओं को जोड़ कर रखती हैं,ठीक उसी तरह जैसे एक परिवार का सूत्र पूरे परिवार कॊ संगठित रखता है।”

उपरोक्त विचार उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश चंद्र शास्त्री ने सत्या फाउंडेशन तथा संवाद की ओर से हरिद्वार प्रेस क्लब के सभागार में आयोजित ‘कब और कैसे बनेगी हिंदी, हिंद की राष्ट्रभाषा’ विषय विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हुए व्यक्त किये। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय हिंदी दिवस के उपलक्ष में किया गया था। कार्यक्रम में हिंदी विषयक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया तथा पूर्व शिक्षिका तथा कवियित्री नीता नय्यर ‘निष्ठा’ की पुस्तक ‘कहाँ है निष्ठा’ का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ। सभी कवियों को ‘संवाद काव्यश्री सम्मान’ से विभूषित किया गया। साथ ही वरिष्ठ कवियित्री तथा पूर्व शिक्षिका श्रीमति नीता नय्यर ‘निष्ठा’ की नव प्रकाशित पुस्तक ‘कहाँ है निष्ठा’ का लोकार्पण भी किया जायेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सत्या फाउंडेशन के संरक्षक देवीसिंह राणा ने की, जबकि, संचालन अरुण कुमार पाठक ने किया।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी के सचिव डा. बाजश्रवा आर्य ने कहा कि, “अब शिक्षा के माध्यम का विकल्प हिंदी होने से शिक्षा क्षेत्र में निश्चित रूप से हिंदी को बढ़ावा मिल रहा है।” डा. नरेश मोहन ने कहा कि, “हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने में विलंब के राजनीतिक कारण है।” हिन्दी समुइह के प्रमुख डा. अशोक गिरि ने कहा कि ” हिंदी को राजभाषा का दर्जा देने में अब कोई देरी नहीं की जानी चाहिए।” चेतना पथ संपादक अरुण कुमार पाठक ने कहा कि, “जिस प्रकार से व्यक्ति के माता-पिता का स्थान होता है, उसी प्रकार से हिंदी को देश की भाषा का मान मिलना चाहिए। साथ ही हमें अपने आपसे हिंदी में व्यवहार करने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में हरिद्वार प्रेस क्लब के अध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार डा. राधिका नागरथ, ग्रीन मैन विजयपाल बघेल, हिन्दी विशेषज्ञ डा. मेनका त्रिपाठी आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
कवि गोष्ठी का शुभारम्भ वृंदा ‘वाणी’ की वाणी वंदना तथा उनके काव्य पाठ से हुआ। इसके बाद सुभाष मलिक, डा. मीरा भारद्वाज, डा. सुशील त्यागी ‘अमित’, डा. प्रशांत कौशिक, अरुण कुमार पाठक, अर्चना झा ‘सरित’, डा. अशोक गिरि, डा. मेनका त्रिपाठी, नीता नय्यर ‘निष्ठा’, अरविन्द दुबे, देवेन्द्र मिश्र ने काव्य पाठ करते हुए हिंदी का गुणगान किया तथा श्रोताओं की तालियाँ तथा वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम की अध्यक्षता सत्या फाउंडेशन के संरक्षक देवीसिंह राणा करेंगे।
इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के विग्रह के समक्ष दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण तथा पुष्पार्पण से हुई। सत्या फाउंडेशन व संवाद चैनल के संस्थापक दीपक पँवार ने दोनों आयोजक संस्था का परिचय दिया। सभी अतिथियों को अंगवस्त्र तथा स्मृति चिन्हों से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सरिता पँवार, रोशन राणा, डा. विशाल गर्ग, आयुष पँवार, मिनी पुरी, पावरलिफ्टर संगीता राणा, बबीता योगाचार्या, संजय गर्ग, विष्णु अग्रवाल, सुशील कुमार झा, डा. नगेन्द्र प्रताप सिंह, घनश्याम साहनी, नरेश गर्ग, विश्वास सक्सैना, नमन गोस्वामी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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