यश हरिद्वार न्यूज

जनपथ हरिद्वार अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय एवं स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र भारतीय उच्चायोग कजाकिस्तान द्वारा आयोजित “यूरेशिया और भारत में हिंदी का वर्तमान और भविष्य “इस विषय पर पहला अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रीय वैज्ञानिक व्यावहारिक हिंदी सम्मेलन तिथि 13और 14 मार्च 2024 को कजाकिस्तान देश के अलमाटी शहर में बड़ी सफलता के साथ संपन्न हुआ l इस सम्मेलन का उदघाटन मा.डॉ.टी.वी नागेंद्र प्रसाद, राजदूत कजाकिस्तान, मा.श्री. रविन्द्र प्रसाद जयसवाल, सचिव विदेश मंत्रालय, भारत सरकार ,मा.श्री.रविकांत निदेशक विदेशमंत्रालय भारत सरकार दिल्ली.दोसोवा सेनीमगुल नौरिजबाएवना, कजाकिस्तान, मा.प्रो.सुनील कुलकर्णी, निदेशक केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा, दिल्ली इन अतिथियों के द्वारा किया गया l इस सम्मेलन में देश-विदेश से अनेक प्रतिभागी उपस्थित थे l प्रत्येक प् प्रोफेसरों ने अपने- अपने विषय से संबंधित आलेख प्रस्तुत किये l इस सम्मेलन के प्रथम सत्र में हरिद्वार की डॉक्टर मेनका त्रिपाठी ने “हिन्दी में विज्ञान लेखन की समस्याओं “पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया और उनके निवारण हेतु सुझाव दिए! उन्होंने अपने व्याख्यान के ज़रिए हमें बताया कि हिंदी में लिखने की क्षमता लोग ख़ुद ही खोते जा रहे हैं हिंदी में ज़्यादातर विज्ञान लेखन उनके द्वारा हो रहा है जो ख़ुद पेशेवर वैज्ञानिक नहीं है वैज्ञानिकों का लिखा अक्सर अंग्रेज़ी में अनूदित मिलता है आने वाली पीढ़ियों में पढ़े लिखे लोगों में भारतीय भाषाओं में विज्ञान लिखने पढ़ने वाले लोग कम होते जा रहे हैं अक्सर इन बातों को बदलते वक़्त इतना वक़्त का खेल कह दिया जाता है पर दरअसल ये राजनीतिक सच्चाइयां है विज्ञान की भाषा कैसी हो इसे राष्ट्रवाद का विकास आदि में ढालकर देखा जाता है ।डॉ मेनका त्रिपाठी का व्याख्यान बहुत ही प्रभावी रहा साथ ही उनकी आलेख पुस्तक फिजी संदेश का विमोचन भी विश्वविद्यालय में किया गया! 21देशों से आए विद्वानों में प्रो.वी.कृष्णा, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय,डॉ सरिता शुक्ला हैदराबाद,डॉ.सुधीर सिंह, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली,प्रो.के. अजिता, कोचीन विश्वविद्यालय कोचीन केरल ,प्रो. रमा देवी, दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली, प्रो.जयंत कर शर्मा, कुलसचिव, ओडिसा मुक्त विश्वविद्यालय, ओडिसा, मुकेश मिश्रा, बलराम गुप्ता डॉ सरिता शुक्ला, आदि.उपस्थित थे l इस सम्मेलन में डॉ.दारिंगा कोकोनेवा अल-फराबी कजाख राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, कजाकिस्तान और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र भारतीय उच्चायोग केंद्र के निदेशक डॉ. संजय वेदी जी द्वारा आपको आमंत्रित किया गया! डॉक्टर त्रिपाठी ने बताया कि हमारा यह दृढ़ संकल्प है कि हमारा सारा जीवन हिंदी साहित्य को समर्पित है और हिन्दी भाषा का का परचम पूरे विश्व में फैलाने में हम सब क़ामयाब होंगे हिन्दी के प्रति आपकी निष्ठा और समर्पण प्रशंसनीय है! डॉ मेनका त्रिपाठी ने इस विशेष उपलब्धि का श्रेय अपने पिता श्री वीरेंद्र त्रिपाठी जी को दिया है!
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